आज के समय में बहुत से लोगों को पुलिस द्वारा एक नोटिस भेजा जाता है जिसमें लिखा होता है कि उन्हें किसी मामले में पूछताछ के लिए थाने आना है। ऐसे नोटिस को अब नए कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 35 के तहत भेजा जाता है, जो पहले CrPC की धारा 41A के नाम से जाना जाता था। लेकिन आम लोगों को अक्सर यह समझ नहीं आता कि यह नोटिस क्या होता है, क्या इसका मतलब गिरफ्तारी है, और क्या पुलिस बिना गिरफ्तार किए भी पूछताछ कर सकती है।
धारा 35 BNSS का मूल उद्देश्य यह है कि किसी व्यक्ति को तुरंत गिरफ्तार करने के बजाय पहले उसे नोटिस देकर जांच में सहयोग का अवसर दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कई मामलों में यह साफ कहा है कि गिरफ्तारी अंतिम विकल्प होनी चाहिए, पहली कार्रवाई नहीं। इसी सिद्धांत के आधार पर यह व्यवस्था लाई गई कि यदि कोई व्यक्ति जांच में सहयोग कर सकता है और उसकी तत्काल गिरफ्तारी जरूरी नहीं है, तो उसे नोटिस देकर बुलाया जाए।
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जब पुलिस आपको 35 BNSS का नोटिस देती है, तो इसका अर्थ यह नहीं होता कि आप अपराधी घोषित हो चुके हैं। इसका मतलब सिर्फ इतना होता है कि पुलिस आपसे पूछताछ करना चाहती है या कुछ जानकारी चाहती है। कानून यह भी कहता है कि यदि आप नोटिस का पालन करते हैं और जांच में सहयोग करते हैं, तो सामान्य परिस्थितियों में पुलिस आपको गिरफ्तार नहीं कर सकती।
बहुत लोग डर के कारण या गलत सलाह के कारण नोटिस को गंभीरता से नहीं लेते और थाने नहीं जाते। यह एक बड़ी गलती हो सकती है। यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर 35 BNSS के नोटिस की अवहेलना करता है, तो पुलिस को यह आधार मिल सकता है कि वह व्यक्ति जांच में सहयोग नहीं कर रहा, और ऐसी स्थिति में गिरफ्तारी का रास्ता खुल सकता है।
यह भी समझना जरूरी है कि पुलिस आपको पूछताछ के लिए बुला सकती है, लेकिन पूछताछ के दौरान आपके कुछ मौलिक अधिकार सुरक्षित रहते हैं। आपसे जबरदस्ती बयान नहीं लिया जा सकता, आपको मानसिक या शारीरिक रूप से प्रताड़ित नहीं किया जा सकता और यदि मामला गंभीर है तो आप वकील से सलाह लेकर ही थाने जा सकते हैं। कई मामलों में यह देखा गया है कि सही कानूनी रणनीति अपनाकर व्यक्ति गिरफ्तारी से बच जाता है और मामला नियंत्रित ढंग से आगे बढ़ता है।
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एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि 35 BNSS का नोटिस मिलने के बाद panic करना नहीं, बल्कि situation को legally handle करना जरूरी होता है। अगर आपको लगता है कि मामला संवेदनशील है या आपके खिलाफ गलत आरोप लगाए गए हैं, तो ऐसे में आप पहले से anticipatory bail की तैयारी कर सकते हैं, या फिर किसी criminal lawyer से case-specific सलाह लेना समझदारी होती है।
आज के डिजिटल दौर में पुलिस WhatsApp, email या घर पर भी नोटिस भेज सकती है, लेकिन नोटिस वैध तभी माना जाएगा जब वह कानून के अनुसार जारी किया गया हो। इसलिए हर नोटिस को carefully पढ़ना, उसकी language समझना और जरूरत पड़ने पर legal advice लेना बेहद जरूरी है।
अंत में यह समझना जरूरी है कि 35 BNSS का नोटिस डरने की चीज नहीं है, बल्कि यह नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए बनाई गई एक व्यवस्था है ताकि बिना जरूरत गिरफ्तारी न हो। लेकिन यह सुरक्षा तभी काम करती है जब व्यक्ति कानून की प्रक्रिया का सम्मान करे और सही तरीके से response दे।
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अगर आपको कभी ऐसा नोटिस मिलता है, तो घबराने के बजाय शांत रहकर स्थिति को समझें और जरूरत पड़ने पर किसी अनुभवी criminal lawyer से मार्गदर्शन जरूर लें, क्योंकि हर केस के तथ्य अलग होते हैं और उसी के अनुसार strategy बनती है।
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