सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव Advocate-on-Record (AoR) परीक्षा मानी जाती है। जून 2025 में आयोजित इस परीक्षा के परिणाम हाल ही में सामने आए हैं, जिनसे यह साफ होता है कि यह परीक्षा सिर्फ ज्ञान नहीं, बल्कि निरंतरता और धैर्य की भी परीक्षा है।
इस वर्ष कुल 207 वकीलों ने सफलतापूर्वक AoR परीक्षा पास की है। ये सभी अब Supreme Court of India में स्वतंत्र रूप से केस फाइल करने और रिकॉर्ड पर अधिवक्ता के रूप में कार्य करने के पात्र बन गए हैं।
लेकिन इस परीक्षा की विशेषता केवल पास-फेल तक सीमित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट नियम, 2013 के अंतर्गत बनाए गए AoR Regulations ऐसे उम्मीदवारों को भी दूसरा अवसर देते हैं, जो मामूली अंतर से आवश्यक मानकों को पूरा नहीं कर पाए।
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AoR परीक्षा में दोबारा अवसर: 115 उम्मीदवारों को राहत
इस बार 115 ऐसे उम्मीदवार भी हैं जिन्हें अगली परीक्षा में दोबारा बैठने की अनुमति दी गई है। यह अनुमति Regulation 11 के तहत दी जाती है, जिसे दो भागों में समझा जा सकता है।
इन नियमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जो उम्मीदवार समग्र रूप से सक्षम हैं, उन्हें केवल एक पेपर या कुल अंकों के अंतर के कारण बाहर न किया जाए।
Regulation 11(i): एक पेपर में कमी, लेकिन कुल प्रदर्शन मजबूत
63 उम्मीदवार ऐसे हैं जो Regulation 11(i) के अंतर्गत आते हैं।
इस नियम के अनुसार:
यदि कोई उम्मीदवार किसी एक पेपर में 50% अंक नहीं ला पाया,
लेकिन बाकी सभी पेपरों को मिलाकर 60% या उससे अधिक औसत प्राप्त कर लिया,
तो उसे उसी एक पेपर में अगली AoR परीक्षा में दोबारा बैठने की अनुमति दी जाती है।
अगर उम्मीदवार अगली परीक्षा में उस पेपर में 50% अंक प्राप्त कर लेता है, और पहले के पेपरों के अंकों के साथ मिलाकर कुल औसत 60% हो जाता है, तो उसे AoR परीक्षा उत्तीर्ण घोषित कर दिया जाता है।
यह प्रावधान उन वकीलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है जो लगभग सफल हो चुके होते हैं।
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Regulation 11(ii): सभी पेपर पास, लेकिन कुल औसत कम
52 उम्मीदवार Regulation 11(ii) के अंतर्गत आते हैं।
यह नियम उन स्थितियों के लिए है जहाँ:
उम्मीदवार ने सभी पेपर पास कर लिए हों,
लेकिन कुल औसत 60% से कम रह गया हो।
ऐसे उम्मीदवार को:
किसी एक पेपर में अगली परीक्षा में दोबारा बैठने का अवसर दिया जाता है,
और यदि उस पेपर में प्राप्त अंक जोड़ने के बाद कुल औसत 60% हो जाता है,
तो उसे भी AoR परीक्षा पास माना जाता है।
यह व्यवस्था यह दर्शाती है कि सुप्रीम कोर्ट केवल एक परीक्षा के आधार पर किसी वकील की योग्यता का अंतिम मूल्यांकन नहीं करता।
AoR प्रणाली का महत्व और संदेश
Advocate-on-Record परीक्षा केवल एक प्रोफेशनल परीक्षा नहीं है, बल्कि यह सुप्रीम कोर्ट की कार्यप्रणाली, जिम्मेदारी और अनुशासन को समझने का माध्यम भी है। Regulation 11 जैसे प्रावधान यह दिखाते हैं कि प्रणाली न्यायसंगत, व्यावहारिक और अवसर देने वाली है।
जो उम्मीदवार इस बार सफल नहीं हो पाए, उनके लिए यह परिणाम निराशा नहीं, बल्कि दूसरे अवसर का संकेत है।
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AoR परीक्षा 2025 के परिणाम यह स्पष्ट करते हैं कि सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने का रास्ता कठिन जरूर है, लेकिन निष्पक्ष है। 207 नए AoR का जुड़ना और 115 उम्मीदवारों को दोबारा अवसर मिलना—यह दोनों बातें यह बताती हैं कि कानून के इस सर्वोच्च मंच पर गुणवत्ता के साथ-साथ न्यायपूर्ण अवसर को भी महत्व दिया जाता है।
जो युवा वकील इस राह पर हैं, उनके लिए यह एक स्पष्ट संदेश है: लगातार प्रयास, सही समझ और धैर्य—यही AoR बनने की कुंजी है।
AoR Exam Results - AoR Exam Results 2025

