Right to Disconnect Act 2025: Employees को क्या अधिकार मिल रहे हैं?
आज के भारत में काम का तरीका तेज़ी से बदला है। मोबाइल फोन, लैपटॉप, वर्क-फ्रॉम-होम और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने काम को आसान तो बनाया, लेकिन एक नई समस्या भी पैदा कर दी—काम का कोई समय नहीं बचा। सुबह, रात, छुट्टी, रविवार—हर समय ऑफिस का फोन, मैसेज या ई-मेल आने लगा। धीरे-धीरे यह स्थिति सामान्य बना दी गई कि कर्मचारी हर समय “available” रहें।
इसी पृष्ठभूमि में Right to Disconnect Act, 2025 एक बेहद महत्वपूर्ण और समयानुकूल कानून के रूप में सामने आया है। यह कानून पहली बार साफ शब्दों में कहता है कि काम खत्म होने के बाद कर्मचारी को काम से पूरी तरह disconnect होने का अधिकार है, और यह अधिकार सिर्फ नैतिक नहीं, बल्कि कानूनी है।
यह लेख इसी कानून को आम भाषा में समझाने की कोशिश है—क्यों इसकी जरूरत पड़ी, कर्मचारियों को क्या-क्या अधिकार मिलते हैं, शिकायत कैसे की जा सकती है, और अगर नियोक्ता (employer) कानून तोड़ता है तो उस पर क्या कार्रवाई हो सकती है।
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क्यों जरूरी हुआ Right to Disconnect Act?
मान लीजिए एक IT कंपनी में काम करने वाला कर्मचारी रात 10 बजे अपने परिवार के साथ खाना खा रहा है। तभी मैनेजर का मैसेज आता है—“urgent task, please check immediately।” कर्मचारी अगर मना करे तो अगली appraisal में उसका असर पड़ेगा, यह डर हमेशा बना रहता है। यही स्थिति लाखों भारतीय कर्मचारियों की बन चुकी थी।
इस लगातार उपलब्ध रहने की संस्कृति ने कई गंभीर समस्याएँ पैदा कीं—
मानसिक तनाव और burnout
नींद की कमी
परिवार और व्यक्तिगत जीवन पर बुरा असर
महिलाओं पर दोहरी जिम्मेदारी का दबाव
मानसिक स्वास्थ्य संबंधी बीमारियाँ
भारत में अब तक Factories Act, Shops & Establishments Laws, labour welfare legislations काम के घंटे तो तय करते थे, लेकिन डिजिटल work intrusion पर कोई स्पष्ट कानून नहीं था। Right to Disconnect Act इसी खाली जगह को भरने के लिए लाया गया है। यह कानून यह स्वीकार करता है कि काम के अधिकार के साथ-साथ आराम करने का अधिकार भी एक मौलिक मानवीय आवश्यकता है।
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Right to Disconnect Act 2025 क्या कहता है?
मतलब—
ऑफिस hours के बाद calls, messages, emails का जवाब देना अनिवार्य नहीं
छुट्टी या leave के दौरान work communication से इनकार किया जा सकता है
“Available 24×7” रहने की expectation गैर-कानूनी मानी जाएगी
यह अधिकार सिर्फ private कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि—
Private sector
Government employees
Contractual staff
Work-from-home employees
Gig और platform workers (जहाँ applicable हो)
सभी पर यह कानून समान रूप से लागू होता है।
कर्मचारियों को कौन-कौन से अधिकार मिलते हैं?
इस कानून के तहत कर्मचारी को सबसे पहला और महत्वपूर्ण अधिकार मिलता है—डर के बिना disconnect होने का अधिकार।
अब कर्मचारी यह कह सकता है कि—
“मैं ऑफिस time के बाद काम नहीं करूँगा”
“मेरी छुट्टी के दौरान मुझसे काम की अपेक्षा न रखें”
और इसके लिए—
Salary कटौती नहीं हो सकती
Promotion या appraisal में नुकसान नहीं किया जा सकता
Termination या disciplinary action नहीं लिया जा सकता
कानून साफ कहता है कि disconnect करने के कारण किसी भी प्रकार का प्रतिकूल व्यवहार illegal होगा।
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क्या हर स्थिति में disconnect किया जा सकता है?
कानून यथार्थवादी है। यह नहीं कहता कि हर स्थिति में काम से मना किया जा सकता है। कुछ exceptional परिस्थितियाँ भी परिभाषित की गई हैं—
National emergency
Natural disaster
गंभीर सुरक्षा खतरा
Essential services (जैसे healthcare, disaster response)
लेकिन यहाँ भी employer को यह साबित करना होगा कि स्थिति वास्तव में आपातकालीन थी, न कि “routine urgency”।
Employer की क्या जिम्मेदारियाँ तय की गई हैं?
Right to Disconnect Act केवल कर्मचारियों को अधिकार नहीं देता, बल्कि employers पर भी स्पष्ट जिम्मेदारियाँ डालता है।
Employer को—
Clear working hours define करने होंगे
Internal policy बनानी होगी जिसमें disconnect norms हों
Managers और supervisors को sensitise करना होगा
Employees को लिखित रूप में उनके अधिकारों की जानकारी देनी होगी
अब यह बहाना नहीं चलेगा कि—“हमारी कंपनी की culture ऐसी है।”
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अगर employer कानून तोड़े तो complaint कैसे करें?
सबसे बड़ा सवाल यही होता है—अगर बॉस नहीं माने तो क्या करें?
Right to Disconnect Act एक step-by-step grievance mechanism देता है।
सबसे पहले कर्मचारी को internal grievance cell या HR को लिखित शिकायत देनी होगी। अगर 30 दिनों के भीतर समाधान नहीं होता, तो—
Labour Authority / Designated Officer के पास शिकायत
Online portal के माध्यम से complaint
Documentary proof जैसे messages, emails attach किए जा सकते हैं
महत्वपूर्ण बात यह है कि शिकायत करने के कारण कर्मचारी को कोई नुकसान नहीं पहुँचाया जा सकता।
Employer पर क्या penalties लग सकती हैं?
अगर जांच में यह साबित हो जाए कि employer ने—
जानबूझकर कर्मचारियों को work hours के बाहर काम के लिए मजबूर किया
शिकायत करने पर प्रताड़ना की
कानून का बार-बार उल्लंघन किया
तो उस पर—
Monetary penalty
Compensation to employee
Repeated violation पर higher fines
Extreme cases में license suspension तक की व्यवस्था है
यह कानून symbolic नहीं, बल्कि enforceable बनाया गया है।
महिलाओं और working parents के लिए क्यों अहम है यह कानून?
भारतीय समाज में महिलाओं पर work + family का दोहरा बोझ होता है। ऑफिस के बाद भी calls और messages उनके घरेलू दायित्वों को और कठिन बना देते हैं।
Right to Disconnect Act महिलाओं के लिए—
Safe work environment
Mental health protection
Work-life balance का कानूनी आधार
प्रदान करता है। यही बात working parents और caregivers पर भी लागू होती है।
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क्या यह कानून भारतीय संविधान से जुड़ा है?
हाँ। इस कानून की आत्मा सीधे-सीधे—
Article 21 – Right to Life & Dignity
Right to Health
Right to Privacy
से जुड़ी हुई है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही कई मामलों में कह चुका है कि गरिमापूर्ण जीवन का अर्थ सिर्फ जीवित रहना नहीं, बल्कि मानसिक शांति भी है।
निष्कर्ष
Right to Disconnect Act 2025 सिर्फ एक labour law नहीं है, बल्कि यह भारत के evolving work culture का reflection है। यह कानून यह मान्यता देता है कि काम जरूरी है, लेकिन इंसान उससे ज्यादा जरूरी है। यह कानून कर्मचारियों को आवाज देता है, boundaries तय करता है और employers को यह याद दिलाता है कि productivity का मतलब exploitation नहीं होता। अगर सही तरीके से लागू हुआ, तो यह कानून भारतीय workplaces को ज्यादा humane, balanced और respectful बना सकता है।
