भारत में बच्चों के विरुद्ध यौन अपराधों की बढ़ती घटनाओं ने एक विशेष और सुसंगठित कानून की आवश्यकता को जन्म दिया। इसी पृष्ठभूमि में Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012 (POCSO Act) लागू किया गया। यह अधिनियम 18 वर्ष से कम आयु के प्रत्येक बच्चे को यौन शोषण, उत्पीड़न और अश्लील शोषण से संरक्षण प्रदान करने के लिए बनाया गया है।
यह कानून केवल अपराधों को परिभाषित ही नहीं करता, बल्कि जांच, परीक्षण (trial), साक्ष्य रिकॉर्डिंग और पीड़ित संरक्षण के लिए विशेष “child-friendly” प्रक्रिया भी सुनिश्चित करता है।
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Objectives and Key Provisions
POCSO Act के तीन मुख्य उद्देश्य हैं:
बच्चों के विरुद्ध यौन अपराधों की स्पष्ट परिभाषा
विशेष न्यायिक प्रक्रिया की स्थापना
पीड़ितों की सुरक्षा और पुनर्वास सुनिश्चित करना
अधिनियम में विभिन्न प्रकार के अपराधों को वर्गीकृत किया गया है, जैसे:
Section 3 – Penetrative Sexual Assault
Section 5 – Aggravated Penetrative Sexual Assault
Section 7 – Sexual Assault (बिना penetration)
Section 11 – Sexual Harassment
Section 13 – Use of Child for Pornographic Purposes
कानून यह भी सुनिश्चित करता है कि:
सुनवाई in-camera हो
पीड़ित की पहचान सार्वजनिक न की जाए
बयान महिला अधिकारी द्वारा या बाल-अनुकूल वातावरण में दर्ज किया जाए
बच्चे से प्रत्यक्ष कठोर जिरह से बचा जाए
Definitions and Offences
Child की परिभाषा
Section 2(1)(d) के अनुसार “child” वह है जिसकी आयु 18 वर्ष से कम हो।
इस प्रकार, सहमति (consent) का प्रश्न कानून में अप्रासंगिक हो जाता है — 18 वर्ष से कम आयु में कोई भी यौन संबंध अपराध की श्रेणी में आएगा।
Section 3 – Penetrative Sexual Assault
यदि कोई व्यक्ति बच्चे के शरीर के किसी निजी अंग में किसी भी स्तर पर प्रवेश करता है या ऐसा करवाता है, तो वह penetrative sexual assault माना जाएगा।
2019 संशोधन के बाद दंड:
न्यूनतम 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक।
Section 5 – Aggravated Offences
यह उन परिस्थितियों को कवर करता है जहाँ अपराध अधिक गंभीर माना जाता है, जैसे:
बच्चा 12 वर्ष से कम आयु का हो
अपराधी कोई अभिभावक, शिक्षक या प्राधिकृत व्यक्ति हो
अपराध बार-बार किया गया हो
अपराध प्राकृतिक आपदा या साम्प्रदायिक हिंसा के दौरान हुआ हो
अपराध के परिणामस्वरूप मृत्यु या हत्या का प्रयास हुआ हो
दंड (Section 6, संशोधित):
20 वर्ष से आजीवन कारावास तक, और कुछ मामलों में मृत्यु दंड।
Section 7 – Sexual Assault
जब शारीरिक संपर्क हो लेकिन penetration न हो, और वह यौन उद्देश्य से हो, तो यह sexual assault की श्रेणी में आएगा।
Section 11 – Sexual Harassment
यदि कोई व्यक्ति अश्लील शब्द, संकेत, ध्वनि या ऑनलाइन माध्यम से बच्चे को यौन उद्देश्य से परेशान करता है, तो यह sexual harassment माना जाएगा।
Section 13 – Use of Children for Pornography
मीडिया या डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से बच्चे का अश्लील उद्देश्यों के लिए उपयोग अपराध है।
पहली सजा: न्यूनतम 5 वर्ष
पुनरावृत्ति पर: 7 वर्ष या अधिक
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Procedures for Reporting and Investigation
Mandatory Reporting – Section 19
यदि किसी व्यक्ति को यह संदेह या जानकारी हो कि किसी बच्चे के साथ यौन अपराध हुआ है, तो उसे बिना विलंब पुलिस या Special Juvenile Police Unit को सूचना देना अनिवार्य है।
रिपोर्ट न करने पर दंड का प्रावधान भी है।
Special Courts
POCSO Act विशेष न्यायालयों की स्थापना का प्रावधान करता है, ताकि मामलों का शीघ्र निपटारा हो सके।
POCSO Rules, 2020 के तहत:
बाल-अनुकूल कक्ष
मनोवैज्ञानिक सहयोग
वीडियो रिकॉर्डिंग
समयबद्ध जांच
जैसी व्यवस्थाएँ अनिवार्य की गई हैं।
Safeguards for Child Victims During Trial
कानून का मुख्य उद्देश्य केवल सजा देना नहीं, बल्कि बच्चे को पुनः आघात से बचाना है।
इसलिए:
In-camera trial
पहचान की गोपनीयता
महिला अधिकारी द्वारा बयान
Support person की उपस्थिति
मीडिया द्वारा नाम/पहचान प्रकाशित करने पर प्रतिबंध
जैसे प्रावधान लागू हैं।
Penalties and Recent Amendments
2019 संशोधन ने दंड को और कठोर बनाया:
16 वर्ष से कम आयु के बच्चे पर गंभीर अपराध में न्यूनतम 20 वर्ष
मृत्यु या अत्यंत गंभीर परिस्थितियों में मृत्यु दंड
हार्मोनल दुरुपयोग जैसे नए अपराध शामिल
इस संशोधन का उद्देश्य था — अपराधों की गंभीरता के अनुरूप कठोर निवारक संदेश देना।
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Landmark Judgments and Implementation Challenges
सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों ने कई बार यह स्पष्ट किया है कि:
पीड़ित-हित सर्वोपरि है
जांच में देरी स्वीकार्य नहीं
बाल-अनुकूल प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है
व्यावहारिक चुनौतियाँ
MTP Act के साथ समन्वय का प्रश्न
लंबित मामलों की अधिक संख्या
ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी
अनिवार्य FIR के कारण सामाजिक दबाव
हालिया सरकारी अधिसूचनाओं में आयु-सहमति को 18 वर्ष पर स्थिर रखने के पीछे यह तर्क दिया गया है कि यह बाल संरक्षण के अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है।
In Summary
POCSO Act, 2012 भारत में बाल यौन अपराधों के विरुद्ध एक व्यापक और सुदृढ़ कानूनी ढांचा प्रदान करता है।
यह अधिनियम:
स्पष्ट अपराध परिभाषा
अनिवार्य रिपोर्टिंग
विशेष न्यायालय
कठोर दंड
बाल-हितैषी प्रक्रिया
जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है। हालाँकि, प्रभावी क्रियान्वयन, संस्थागत सुदृढ़ीकरण और न्यायिक संवेदनशीलता इस कानून की वास्तविक सफलता की कुंजी है।
FAQs
POCSO Act क्या है?
POCSO Act, 2012 एक विशेष कानून है जो 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण देने के लिए बनाया गया है। यह अपराधों की स्पष्ट परिभाषा, विशेष न्यायालय और बाल-हितैषी प्रक्रिया प्रदान करता है।
POCSO Act के तहत “Child” किसे माना जाता है?
Section 2(1)(d) के अनुसार, 18 वर्ष से कम आयु का हर व्यक्ति “child” है।
इसलिए 18 वर्ष से कम आयु में सहमति (consent) का कोई कानूनी महत्व नहीं होता।
क्या POCSO के तहत FIR दर्ज कराना अनिवार्य है?
हाँ। Section 19 के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को यदि अपराध की जानकारी या संदेह है, तो उसे तुरंत पुलिस या Special Juvenile Police Unit को रिपोर्ट करना अनिवार्य है। रिपोर्ट न करने पर दंड संभव है।
POCSO Act के तहत कौन-कौन से मुख्य अपराध हैं?
मुख्य अपराध हैं:
Penetrative Sexual Assault (Section 3)
Aggravated Penetrative Sexual Assault (Section 5)
Sexual Assault (Section 7)
Sexual Harassment (Section 11)
Child Pornography (Section 13)
POCSO Act में सज़ा कितनी होती है?
2019 संशोधन के बाद:
गंभीर अपराधों में न्यूनतम 10 से 20 वर्ष तक की सज़ा
कुछ परिस्थितियों में आजीवन कारावास
अत्यंत गंभीर मामलों में मृत्यु दंड भी संभव
क्या POCSO मामलों की सुनवाई सामान्य अदालत में होती है?
नहीं। POCSO मामलों की सुनवाई Special Courts में होती है, जो त्वरित और बाल-अनुकूल प्रक्रिया सुनिश्चित करती हैं।
क्या POCSO में जमानत मिल सकती है?
हाँ, लेकिन यह अपराध की प्रकृति, साक्ष्य और न्यायालय के विवेक पर निर्भर करता है। गंभीर अपराधों में जमानत कठिन हो सकती है।
क्या पीड़ित की पहचान सार्वजनिक की जा सकती है?
नहीं। कानून के तहत बच्चे की पहचान गोपनीय रखना अनिवार्य है। मीडिया या किसी भी व्यक्ति द्वारा पहचान उजागर करना दंडनीय है।
क्या POCSO और IPC/BNS साथ-साथ लागू हो सकते हैं?
हाँ। कई मामलों में POCSO के साथ-साथ BNS (पूर्व IPC) के प्रावधान भी लागू किए जा सकते हैं।
क्या POCSO में समझौता (compromise) संभव है?
POCSO के अधिकांश अपराध गंभीर और गैर-समझौताकारी (non-compoundable) हैं। इसलिए सामान्यतः समझौता स्वीकार नहीं किया जाता।

